What are Assets and Liabilities In Hindi

ASSETS AND LIABILITIES

What are Assets and Liabilities In Hindi

सम्पत्तियाॅ एवं दायित्व Assets and Liabilities
सम्पत्तियाॅ (Assets )
सम्पत्तियों से आशय उद्यम के आर्थिक स्रोत से है, जिन्हें मुद्रा में व्यक्त किया जा सकता है। जिनका मूल्य होता है और जिनका उपयोग व्यापार के संचालन में किया जाता है। इस प्रकार सम्पत्तियाॅ वे स्रोत है जो भविष्य में लाभ पहुचाती है। उदाहरण के लिए जमीन, मकान, पैसा, रोड, वाहन इत्यादि।
सम्पत्तियाॅ व्यवसाय के मूल्ंयवान साधन है, जिनपर व्यवसाय का स्वामित्व है तथा जिन्हें मुद्रा में मापी जाने वाली लागत में प्राप्त किया जा सकता है।

सम्पत्तियों के प्रकार Type of Assets
1. स्थायी सम्पत्तियाॅ- Fixed Assets

इनका आशय उन सम्पत्तियों से है जो व्यवसाय में दीर्घकाल तक रखे जाने वाली होती है और जो विक्रय के लिए नहीं है उदाहरण भूमि, जमीन, मशीन आदि।
2. चालू सम्पत्तियाॅ- Current Assets

चालू सम्पत्तियों से आशय उन सम्पत्तियों से है जो पुनः विक्रय के लिए या जरूरत पर रोकड में परिवर्तित करने के लिए रखी जाती है, इसलिए इन्हें चालू सम्पत्तियाॅ कहते है। उदाहरण-स्टाॅक, रोकड, देनदार आदि।

3. मूर्त सम्पतियाॅ- Tangible Assets

मूर्त सम्पतियाॅ वे सम्पत्तियाॅ है जिन्हें देखा या छूआ जा सकता है, अर्थात जिनका भौतिक अस्तित्व हो। उदाहरण-भूमि, भवन, मशीन, संयन्त्र, स्टाॅक, रोकड आदि।

4. अमूर्त सम्पतियाॅ-Intangible Assets

अमूर्त सम्पतियाॅ वे सम्पत्तियाॅ है जिनका भौतिक अस्तित्व नहीं होता है, किन्तु मौद्रिक मूल्य होता है। उदाहरण-ख्याति, पेटेण्टस,काॅपीराइट,ट्रेड इत्यादि।
5. क्षयशील सम्पत्तियाॅ- Wasting Assets

क्षयशील सम्पत्तियाॅ वे सम्पत्तियाॅ है जो प्रयोग या उपभोग के कारण घटती जाती है या नष्ट हो जाती है।उदाहरण-खानें, तेल के कुॅए, आदि।

6. तरल सम्पत्तियाॅ- liquid assets

तरल सम्पत्तियाॅ वे चालू सम्पत्तियाॅ है जो या तो नकद/रोकड के रूप में है या जिन्हें शीघ्र ही नकद में परिवर्तित किया जा सकता है। तरल सम्पत्तियों में स्टाॅक एवं पूर्वदत्त व्ययों को शामिल नहीं किया जाता है। इस प्रकार चालू सम्पत्तियाॅ-स्टाॅक$ पूर्वदत्त व्यय=तरल सम्पत्तियाॅ

7. कृत्रिम सम्पत्तियाॅ- Fictious  Assets

कृत्रिम सम्पत्तियों से अभिप्राय मूल्यविहिन सम्पत्तियों से है। इसके अन्तगर्त कुछ व्ययों एवं हानियों को कानूनी या तकनीकी उददेश्य के लिए अस्थायी रूप से सम्पत्ति मान लिया जाता है। ऐसी सम्पत्तियों को न तो भौतिक स्वरूप होता है और न ही इन्हें बेचा जा सकता है। प्रारम्भिक व्यय, विज्ञापन व्यय आदि का वह भाग जो अपलिखित नहीं किया जा सका है, इस प्रकार की सम्पत्तियों के उदाहरण है। उदाहरण-रोकड, बैंक में रोकड, प्राप्य बिल, अल्पकालीन निवेश आदि।

दायित्व Liabilities 

वह धन जो व्यावसायिक उपक्रम को दूसरों को देना है, दायित्व कहा जाता है, जैसे-लेनदार, देय बिल, ऋण एवं अधिविकर्ष, इत्यादि। इस प्रकार, दायित्व देयताएॅ है, ये ऐसी राशियाॅ है, जो लेनदारों को भविष्य में देय है। दूसरे शब्दों में, दायित्व वित्तीय देनदारियाॅ है जिनमें स्वामी का कोष शामिल नहीं होता है।
सम्पत्ति और दायित्व में अन्तर- सम्पत्ति तथा दायित्व दोनों एक-दूसरे के विपरीत शब्द है। इनका अन्तर अग्रलिखित तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है।
अन्तर का आधार सम्पत्ति दायित्व
दायित्वों का वर्गीकरण- दायित्व को दो वर्गो में विभाजित किया जा सकता है:-
(क) स्थायी दायित्व या दीर्घकालिक दायित्व- Long term Liabilities

दीर्घकालिक या स्थायी दायित्वों से अभिप्राय ऐसे दायित्वों से है जिनका भुगतान एक लम्बी अवधि के पश्चात होना है। उदाहरण के लिए ऋण-पत्र, दीर्घकालिक ऋण, दीर्घकालिक जमाएॅ।

(ख) चालू या अल्पकालिक ऋण- Current Liabilities

चालू ऋण वो ऋण कहलाते है जिनका भुगतान अल्प अवधि(साधारणतया एक वर्ष के अन्दर) में किया जाना है। जैस-देय विपत्र, विविध लेनदार, बैंक अधिविकर्ष, अल्पकालीन ऋण, अदत्त व्यय आदि।
लेनदार तीन प्रकार के होते है-
(क) माल के लिए लेनदार  Creditor(ख) व्ययों के लिए लेनदार तथा  (ग) ऋण के लिए लेनदार।
पूॅजी Capital
उस धनराशि या माल को पूॅजी कहा जाता है जिसे व्यवसाय का स्वामी व्यवसाय में लगाता है। इसी राशि से व्यवसाय प्रारम्भ किया जाता है। पूॅजी व्यवसाय की परिसम्पत्तियों पर स्वामी का दायित्व एवं दावा है। अतः इसे चिटठा(तुलन-पत्र) के दायित्व भाग में दर्शाया जाता है। इस प्रकार पूॅजी=कुल परिसम्पत्तियाॅ-कुल बाहय देयताएॅ।

See also: Difference between Assets and Liabilites

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